President Murmu Sings Santali Song | झारखंड में दिखा यादगार पल, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लोकगीत गाकर जीता दिल
जमशेदपुर: झारखंड की सांस्कृतिक धरती पर एक बेहद भावुक और ऐतिहासिक क्षण तब देखने को मिला, जब देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंच से भाषण के साथ-साथ अपनी सुरीली आवाज में संताली लोकगीत गाकर सभी का दिल जीत लिया।
जमशेदपुर के करनडीह स्थित दिशोम जाहेरथान प्रांगण में आयोजित ऑल इंडिया संताली राइटर्स एसोसिएशन और दिशोम जाहेरथान कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में हुए 22वें संताली परसी माहा एवं ओलचिकी शताब्दी समारोह के दौरान यह दृश्य देखने को मिला। राष्ट्रपति ने पूरे कार्यक्रम में संताली भाषा में ही अपना संबोधन दिया, जिससे कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह सांस्कृतिक रंग में रंग गया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन की शुरुआत संताली के पारंपरिक नेहोर गीत से की। जैसे ही उन्होंने गीत की पंक्तियां छेड़ीं, पूरा पंडाल तालियों की गूंज से भर उठा। करीब तीन मिनट तक उन्होंने गीत गाया, जिसके बोल थे—
“जोहार जोहार आयो, आमगे… जीवी होडमो लसावड़हेदो मा…”
राष्ट्रपति ने कहा कि कार्यक्रम में शामिल होने से पहले उन्होंने जाहेर आयो को जोहार अर्पित कर रघुनाथ मुर्मू को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि जीवन की हर उपलब्धि में ईष्टदेव का आशीर्वाद होता है और बचपन में उन्होंने यह गीत सीखा था, जो आज भी उनके मन के बेहद करीब है।
राष्ट्रपति का यह सहज और आत्मीय अंदाज कार्यक्रम में मौजूद लोगों के लिए अविस्मरणीय बन गया। यह क्षण सिर्फ एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं था, बल्कि झारखंड की आदिवासी पहचान, भाषा और परंपरा के प्रति सम्मान का जीवंत उदाहरण भी था।








