Angithi Tragedy | बंद कमरे में अंगीठी बनी मौत का कारण, बिहार में 4 की मौत, झारखंड जैसी घटना ने बढ़ाई चिंता

Share this:

Angithi Tragedy | बंद कमरे में अंगीठी बनी मौत का कारण, बिहार में 4 की मौत, झारखंड जैसी घटना ने बढ़ाई चिंता

छपरा/रांची: कड़ाके की ठंड से बचने के लिए जलायी गई अंगीठी एक बार फिर जानलेवा साबित हुई है। झारखंड के पलामू जिले में नानी–नाती की मौत की घटना के बाद अब बिहार के छपरा जिले से भी ऐसी ही दर्दनाक खबर सामने आई है, जहां बंद कमरे में अंगीठी जलाकर सो रहे एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई, जबकि दो की हालत गंभीर बनी हुई है।

यह हृदयविदारक हादसा सारण जिले के भगवान बाजार थाना क्षेत्र के अंबिका कॉलोनी, भारत मिलाप चौक के पास शुक्रवार देर रात हुआ। अत्यधिक ठंड के कारण परिवार के सात सदस्य एक ही कमरे में सो रहे थे। ठंड से बचाव के लिए कमरे में अंगीठी जलाई गई, लेकिन देर रात तक अंगीठी सुलगती रही और कमरे में कार्बन मोनोऑक्साइड गैस भर गई।

नींद में ही बुझ गई चार जिंदगियां

ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिरने के कारण सो रहे लोगों को किसी तरह के खतरे का अहसास तक नहीं हुआ। इस हादसे में

कमलावती देवी (70 वर्ष)

तेजांश (3 वर्ष)

अध्याय (4 वर्ष)

गुड़िया (7 माह)
की मौके पर ही मौत हो गई।

परिवार के अन्य सदस्य अमित कुमार उर्फ सोनू, अंजलि और अमिषा बेहोशी की हालत में पाए गए। सभी को आनन-फानन में सदर अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने चार लोगों को मृत घोषित कर दिया। अमित कुमार की हालत गंभीर होने पर उन्हें पटना रेफर किया गया है, जबकि अंजलि और अमिषा का इलाज सदर अस्पताल में चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, दोनों का ऑक्सीजन लेवल और बीपी काफी नीचे है।

आई विटनेस की जुबानी

अस्पताल में भर्ती अंजलि ने बताया कि रात में अचानक सांस लेने में तकलीफ हुई, सिर चकराया और फिर कुछ भी याद नहीं रहा। उन्हें सुबह अस्पताल में होश आया। वहीं परिवार के सदस्य मंटू सिंह ने बताया कि रात में घबराहट और छटपटाहट महसूस हुई, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

बंद कमरे में अंगीठी क्यों है जानलेवा

चिकित्सकों और विशेषज्ञों के अनुसार, बंद कमरे में अंगीठी या बोरसी जलाना बेहद खतरनाक होता है। अधजले कोयले से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस रंगहीन और गंधहीन होती है, जो धीरे-धीरे शरीर में पहुंचकर दिमाग को प्रभावित करती है। व्यक्ति को सांस घुटने का एहसास तक नहीं होता और वह नींद में ही इसकी चपेट में आ जाता है।

सतर्कता जरूरी

लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने ठंड के मौसम में अंगीठी के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि

बंद कमरे में अंगीठी या धुआं पैदा करने वाले साधनों का इस्तेमाल न करें,

कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन रखें,

सोते समय अंगीठी पूरी तरह बुझा दें।

यह हादसा न सिर्फ एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि समाज के लिए एक कड़ी चेतावनी भी है कि थोड़ी सी लापरवाही किस तरह कई जिंदगियों को निगल सकती है।

GPL NEWS
Author: GPL NEWS

वर्षों के अनुभव के साथ झारखंड की ज़मीनी सच्चाइयों को निर्भीक और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से सामने लाना। सरकार की योजनाओं से लेकर आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर सटीक, विश्वसनीय और जिम्मेदार समाचार प्रस्तुत करना उद्देश्य है

Latest Updates

Cricket Live Score