रांची:झारखंड में नगर निकाय चुनाव की आहट, गैर-दलीय चुनाव के बावजूद पार्टियों ने तेज की अंदरूनी तैयारी
रांची: झारखंड में आने वाले दिनों में नगर निकाय चुनाव होने वाले हैं। हालांकि ये चुनाव पार्टी के आधार पर नहीं कराए जाएंगे, लेकिन इसके बावजूद राज्य की सभी प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने अंदरूनी रणनीति और तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टियों का स्पष्ट लक्ष्य है कि नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों में ऐसे उम्मीदवारों को जिताया जाए जो उनकी विचारधारा और नीतियों के समर्थक हों, ताकि गैर-दलीय चुनाव होने के बावजूद राजनीतिक पकड़ बनी रहे।
इसी कड़ी में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के केंद्रीय अध्यक्ष और राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आज रांची जिला झामुमो कमेटी की बैठक की। राजनीतिक गलियारों में इस बैठक को स्थानीय निकाय चुनाव की तैयारी की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है।
झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडे ने कहा कि फिलहाल नगर निकाय चुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन मुख्यमंत्री के विदेश दौरे से लौटने के बाद महागठबंधन के सहयोगी दलों के साथ एक अहम बैठक होने की पूरी संभावना है। इस बैठक में झामुमो, कांग्रेस, राजद और सीपीआई माले के वरिष्ठ नेता एक साथ बैठकर चुनावी रणनीति तय करेंगे।
महागठबंधन में समन्वय की तैयारी
कांग्रेस और राजद के नेताओं ने भी साफ किया है कि वे समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ मिलकर नगर निकाय चुनाव लड़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सोनाल शांति ने कहा कि उनकी पार्टी एक साल से अधिक समय से नगर निकाय चुनावों की तैयारी कर रही है। कांग्रेस लोकसभा और विधानसभा चुनावों की तरह ही अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ मिलकर स्थानीय निकाय चुनाव लड़ना चाहती है, ताकि अधिक से अधिक मेयर, डिप्टी मेयर और वार्ड पार्षद कांग्रेस और महागठबंधन की नीतियों में विश्वास रखने वाले बन सकें।
राजद का फोकस सामाजिक न्याय पर
वहीं राजद के प्रदेश सचिव रामकुमार यादव ने कहा कि झारखंड में उनकी पार्टी का मजबूत जनाधार है, जो नगर निकाय चुनावों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि भले ही चुनाव गैर-दलीय हों, लेकिन राजद भी अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ मिलकर विशेष रणनीति बनाएगा।
रामकुमार यादव ने स्पष्ट किया कि राजद ऐसे उम्मीदवारों का समर्थन करेगा जो लालू प्रसाद यादव की नीतियों, सामाजिक न्याय, समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों के अधिकारों और सर्वधर्म सद्भाव की विचारधारा में विश्वास रखते हों। पार्टी चाहती है कि ऐसे लोग मेयर, डिप्टी मेयर और वार्ड पार्षद के रूप में चुने जाएं।
राजनीतिक संकेत साफ
कुल मिलाकर, झारखंड में नगर निकाय चुनाव भले ही गैर-दलीय हों, लेकिन पर्दे के पीछे राजनीतिक दलों की सक्रियता और रणनीतिक तैयारियां यह साफ संकेत दे रही हैं कि आने वाला चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प और कड़ा होने वाला है।








