Mystery Elephant Death: रामगढ़ के गोला वन क्षेत्र में खेत में मिला विशाल हाथी का शव, सूंड के पास खून, मौत की वजह बनी रहस्य
रामगढ़ :जिले के गोला वन क्षेत्र में एक बार फिर मानव-हाथी संघर्ष और वन्यजीव सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जोरावर गांव के एक आलू के खेत में विशाल हाथी का शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। हाथी की सूंड के पास खून के निशान मिलने के बाद अब उसकी मौत को लेकर रहस्य और आशंका दोनों गहराते जा रहे हैं।
हाथी की मौत की खबर फैलते ही आसपास के गांवों से सैकड़ों ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंच गए। देखते ही देखते खेत और उसके आसपास का इलाका लोगों से भर गया। सूचना मिलने पर गोला पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और क्षेत्र को घेराबंदी कर जांच शुरू की।
सुबह खेत पहुंचे ग्रामीण, सामने आया डरावना मंजर
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, सोमवार सुबह जब लोग खेतों की ओर गए तो उन्होंने जोरावर गांव के आलू के खेत में हाथी को मृत अवस्था में पड़ा देखा। पहले तो किसी को विश्वास नहीं हुआ, लेकिन पास जाकर देखने पर साफ हो गया कि हाथी की मौत हो चुकी है। इसके बाद तत्काल वन विभाग को सूचना दी गई।
वनकर्मियों और पुलिस के पहुंचते ही मामले की गंभीरता बढ़ गई, क्योंकि हाथी की सूंड के पास खून बहने के निशान दिखाई दिए, जबकि शरीर के अन्य हिस्सों में कोई स्पष्ट गहरी चोट नजर नहीं आई।
एक महीने में 8 मौतें, हाथियों की मौजूदगी से दहशत
यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब रामगढ़ जिले में हाथियों का बड़ा दल सक्रिय है। गोला, रामगढ़, कुजू और वेस्ट बोकारो इलाके में हाथियों का लगातार विचरण देखा जा रहा है।पिछले एक महीने में हाथियों के कुचलने से 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। दर्जनों घरों और खेतों को नुकसान पहुंचा है, जिससे ग्रामीणों में भय और आक्रोश दोनों है।वन विभाग हाथियों को सुरक्षित जंगलों की ओर भेजने के प्रयास में जुटा है, लेकिन लगातार हो रही घटनाएं व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं।
प्राकृतिक मौत या कोई और वजह?
वन विभाग के अनुसार, हाथी की मौत को लेकर हर पहलू से जांच की जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हाथी की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई,किसी बीमारी की वजह से,आपसी संघर्ष में या फिर किसी मानवीय गतिविधि का इसमें कोई रोल है।पोस्टमार्टम के लिए विशेष डॉक्टरों की टीम को बुलाया गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा।
वन विभाग का बयान
गोला वन क्षेत्र के रेंजर आर.के. सिंह ने बताया—“हाथी की सूंड के पास खून के निशान मिले हैं। शरीर पर अन्य कोई गंभीर बाहरी चोट नहीं दिख रही है। डॉक्टरों की टीम जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत की असली वजह सामने आएगी।”उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है और ग्रामीणों से शांति बनाए रखने व अफवाहों से दूर रहने की अपील की गई है।
इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है—
क्या जंगलों से बाहर निकलते हाथी असुरक्षित माहौल का शिकार हो रहे हैं?
या फिर मानव-हाथी संघर्ष अब एक गंभीर वन्यजीव संकट का रूप ले चुका है?अब सबकी निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं।








