झारखंड की आमदनी घटने से योजनाओं पर मंडराया संकट,मइया सम्मान, अबुआ आवास योजनाओं को लेकर चिंता बढ़ी

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झारखंड की आमदनी घटने से योजनाओं पर मंडराया संकट,मइया सम्मान, अबुआ आवास योजनाओं को लेकर चिंता बढ़ी

रांची: झारखंड की आर्थिक सेहत इस वक्त दबाव में नजर आ रही है। राज्य की आमदनी में आई बड़ी गिरावट ने सरकार की कई अहम योजनाओं पर संकट खड़ा कर दिया है। मइया सम्मान, अबुआ आवास समेत अन्य सामाजिक योजनाओं को लेकर चिंता बढ़ गई है।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2026 में झारखंड का कुल राजस्व संग्रह सिर्फ 1420 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की तुलना में करीब 27 प्रतिशत कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट का सीधा असर विकास कार्यों पर पड़ सकता है।

राज्य में सड़क, पुल और दूसरी बुनियादी परियोजनाओं की रफ्तार धीमी होने की आशंका जताई जा रही है। साथ ही सामाजिक योजनाओं, पेंशन और सरकारी भुगतान में देरी या कटौती की संभावना भी बनी हुई है।

सूत्रों के अनुसार झारखंड इस समय तीन तरफा आर्थिक दबाव झेल रहा है—

केंद्र सरकार से मिलने वाले हजारों करोड़ रुपये अब भी अटके हुए हैं

जीएसटी के कारण सालाना करीब 4 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है

मनरेगा नाम बदलाव से राज्य पर लगभग 6500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने की बात कही जा रही है

हालांकि राज्य के वित्त मंत्री Radha Krishna Kishore ने दावा किया है कि राजस्व में कमी का असर सरकारी योजनाओं पर नहीं पड़ेगा। उनका कहना है कि सरकार अपने संसाधनों से सभी योजनाएं चलाएगी और केंद्र से राज्य के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रहेगा।

लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि राजस्व में गिरावट ने राज्य की आर्थिक स्थिति को कमजोर कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस दबाव से कैसे निपटती है और क्या विकास व कल्याणकारी योजनाएं बिना बाधा आगे बढ़ पाती हैं।

अब बड़ा सवाल यही है —क्या झारखंड इस आर्थिक चुनौती से उबर पाएगा, या आम जनता पर इसका असर और गहराएगा?

GPL NEWS
Author: GPL NEWS

वर्षों के अनुभव के साथ झारखंड की ज़मीनी सच्चाइयों को निर्भीक और निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से सामने लाना। सरकार की योजनाओं से लेकर आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर सटीक, विश्वसनीय और जिम्मेदार समाचार प्रस्तुत करना उद्देश्य है

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