झारखंड का चमत्कारी शिव मंदिर, जहां कभी नहीं भरता अरघा, चैनपुर राजा को हुई थी संतान प्राप्ति
मुकेश तिवारी, गढ़वा: झारखंड का गढ़वा जिला दैवीय शक्तियों और पौराणिक आस्था का अद्भुत संगम माना जाता है। गढ़देवी, वंशीधर, सतबहिनी जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों से समृद्ध इस जिले के रमकंडा प्रखंड अंतर्गत रक्सी गांव में स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर आज भी लोगों के लिए आस्था और चमत्कार का केंद्र बना हुआ है।
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां शिवलिंग का अरघा कभी नहीं भरता, चाहे कितना भी जल या दूध क्यों न चढ़ाया जाए। यहां संतान प्राप्ति की इच्छा लेकर श्रद्धालु पहुँचते हैं. ओर उनकी मनोकामना पूरी होती है.
माघ तेरस मेला और सैकड़ों साल पुरानी परंपरा
रमकंडा प्रखंड मुख्यालय से करीब पाँच किलोमीटर दूर स्थित इस मंदिर में हर वर्ष माघ महीने में एक सप्ताह तक माघ तेरस मेला लगता है। जिसकी शुरुआत आज से हो रही है. दूर-दराज़ से श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं और मनोकामना पूर्ति की कामना करते हैं।
ग्रामीणों और पुजारी गोपाल पाण्डेय के अनुसार, यहां मांगी गई मन्नतें पूरी होने के कई प्रत्यक्ष प्रमाण मौजूद हैं। 16 जनवरी से शुरू हो रहे इस मंदिर परिसर में माघ तेरस मेला आगामी 24 जनवरी तक चलेगा.
राजा की मनोकामना और स्वयं प्रकट शिवलिंग
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, करीब 125 वर्ष पहले चैनपुर स्टेट के राजा राय भागवत दयाल सिंह को संतान नहीं थी। स्वयं प्रकट शिवलिंग की जानकारी मिलने पर उन्होंने यहां पुत्र प्राप्ति की कामना की। कुछ समय बाद उन्हें संतान की प्राप्ति हुई।
राजा ने शिवलिंग को चैनपुर गढ़ ले जाने का प्रयास किया, लेकिन शिवलिंग हाथी पर लादे जाने के बावजूद हाथी वहीं बैठ गया और हिला तक नहीं। इसे दैवीय संकेत मानते हुए राजा ने यहीं मंदिर निर्माण का निर्णय लिया। राजा के निधन के बाद यह कार्य रानी साहिबा ने पूर्ण कराया।
गर्म दूध से आई शिवलिंग में दरार
किंवदंती है कि एक भक्त प्रतिदिन शिवलिंग पर दूध चढ़ाता था। एक दिन दूध गर्म होने के बावजूद उसने पूजा न छोड़ने के उद्देश्य से गर्म दूध शिवलिंग पर अर्पित कर दिया, जिससे शिवलिंग में दरार आ गई। वह दरार आज भी मौजूद है।
इसी घटना के बाद इस मंदिर को “स्वप्न शिव मंदिर” के नाम से भी जाना जाने लगा।
50 फीट ऊंचाई से गिरा युवक, खरोंच तक नहीं
हाल के वर्षों में मंदिर की रंगाई-पुताई के दौरान एक युवक करीब 50 फीट ऊंचाई से गिर गया, लेकिन उसे कोई गंभीर चोट नहीं आई। कुछ ही देर में वह उठकर दोबारा काम में लग गया। इस घटना को भी ग्रामीण शिव की कृपा मानते हैं।
नक्सल प्रभावित क्षेत्र में छुपा चमत्कारी धाम
यह इलाका लंबे समय तक नक्सल प्रभावित और सुदूर क्षेत्र रहा, जिस कारण यह मंदिर व्यापक पहचान नहीं बना सका। लेकिन अब धीरे-धीरे इसकी ख्याति बढ़ रही है और श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
रक्सी गांव में भव्य हनुमान मंदिर भी बना आस्था का केंद्र
करीब चार साल पहले रांची के महामंडलेश्वर श्री सूर्यनारायण दास त्यागी जी महाराज के प्रयास से रक्सी गांव में एक भव्य हनुमान मंदिर का निर्माण हुआ।
ग्रामीणों के अनुसार रामनवमी के अवसर पर यहां विशेष पूजा होती है और अब सालभर श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।








