गढ़वा में शिक्षक हत्याकांड में दोषी जीतेंद्र दुबे को आजीवन सश्रम कारावास
गढ़वा: शहर के बहुचर्चित शिक्षक हत्याकांड में गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए गढ़वा जिला व्यवहार न्यायालय के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज प्रसाद की अदालत ने आरोपी जीतेंद्र दुबे को दोषी करार देते हुए आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने भादवि की धारा 302 के तहत आजीवन सश्रम कारावास एवं 50 हजार रुपये आर्थिक जुर्माना लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत तीन वर्ष कारावास की सजा भी सुनाई गई। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक उमेश दीक्षित ने प्रभावी पैरवी की।
जमीनी विवाद में हुई थी शिक्षक की हत्या
मृतक आलोक कुमार द्विवेदी गढ़वा स्थित राम साहू हाई स्कूल में अंग्रेजी विषय के शिक्षक थे। उनकी पत्नी निशा दुबे के लिखित आवेदन के आधार पर 22 अप्रैल 2014 को गढ़वा थाना कांड संख्या 159/2014 दर्ज किया गया था। आरोप के अनुसार, शिक्षक आलोक कुमार द्विवेदी स्कूल से अपने सहिजना स्थित घर लौट रहे थे। इसी दौरान पूर्व से घात लगाए आरोपितों ने जमीनी विवाद को लेकर उन्हें गोली मार दी और फरार हो गए।घटना के समय मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोपितों को गोली मारकर भागते देखा तथा परिजनों को सूचना दी। गंभीर हालत में शिक्षक को सदर अस्पताल लाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
पहले भी आ चुका है फैसला
पुलिस अनुसंधान के बाद सभी आरोपितों के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया गया। सत्रवाद संख्या 299/2014 में रामकृष्ण दुबे, ललन दुबे एवं आशुतोष दुबे के विरुद्ध 6 फरवरी 2017 को फैसला सुनाया जा चुका है, जबकि एक नाबालिग आरोपी का मामला अलग चलाया गया था।
अलग सत्रवाद में चला मुकदमा
आरोपी जीतेंद्र दुबे के विरुद्ध सत्रवाद संख्या 127/2015 के तहत अलग से सुनवाई हुई। उपलब्ध साक्ष्य, दस्तावेज एवं गवाहों के बयान के आधार पर अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई । बताया गया कि जीतेंद्र दुबे अन्य मामले में आरोपित होने के कारण वर्तमान में घाटशिला कारा में बंद है। उसकी पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराई गई।करीब 12 वर्ष पुराने इस चर्चित हत्याकांड में आए फैसले ने एक बार फिर साबित किया है कि कानून के शिकंजे से अपराधी बच नहीं सकते है।







