LPG Subsidy Update 2026: महंगे अमेरिकी आयात से बढ़ेगी लागत, रसोई गैस सब्सिडी का फॉर्मूला बदल सकती है सरकार
दिल्ली: घरेलु रसोई गैस उपभोक्ताओं से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। LPG Subsidy Update 2026 के तहत केंद्र सरकार रसोई गैस (एलपीजी) पर दी जाने वाली सब्सिडी की गणना पद्धति में बदलाव पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसकी मुख्य वजह एलपीजी आयात के स्रोत में आने वाला बड़ा बदलाव बताया जा रहा है।
फिलहाल भारत में एलपीजी सब्सिडी की गणना सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस के आधार पर की जाती है। अब तक देश की अधिकांश एलपीजी आपूर्ति खाड़ी देशों से होती रही है, जहां यह कीमत एक वैश्विक बेंचमार्क मानी जाती है और परिवहन लागत भी अपेक्षाकृत कम रहती है।
लेकिन 2026 से सरकारी तेल कंपनियां हर साल लगभग 22 लाख टन एलपीजी अमेरिका से आयात करेंगी। यह भारत के कुल एलपीजी आयात का करीब 10 प्रतिशत होगा। अमेरिकी एलपीजी की कीमतें और वहां से भारत तक का लंबा समुद्री सफर व ज्यादा फ्रेट खर्च तेल कंपनियों की कुल लागत को बढ़ा सकता है।
तेल क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि कीमतों में उतार-चढ़ाव के दौरान अमेरिकी आयात का सीधा असर कंपनियों की लागत पर पड़ेगा। ऐसे में मौजूदा सब्सिडी फॉर्मूला वास्तविक लागत को पूरी तरह नहीं दर्शा पाएगा, जिस कारण सरकार नए फॉर्मूले पर विचार कर रही है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित बदलाव का उद्देश्य उपभोक्ताओं पर तत्काल बोझ डालना नहीं है, बल्कि सब्सिडी व्यवस्था को वास्तविक आयात लागत के अधिक करीब लाना है, ताकि तेल कंपनियों पर बढ़ते वित्तीय दबाव को संतुलित किया जा सके।
आने वाले समय में यदि यह नया फॉर्मूला लागू होता है, तो रसोई गैस की सब्सिडी प्रणाली में एक बड़ा नीतिगत बदलाव देखने को मिल सकता है, जिस पर आम उपभोक्ताओं और ऊर्जा क्षेत्र की निगाहें टिकी रहेंगी।








