दो बड़े मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, एसआईआर दस्तावेज पर स्पष्टीकरण और NCERT किताब पर स्वतः संज्ञान
10वीं प्रवेश पत्र को पहचान में मान्यता, ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ पाठ पर CJI की नाराजगी
नई दिल्ली: देश के दो अहम मुद्दों पर Supreme Court of India ने बुधवार को महत्वपूर्ण सुनवाई की। एक ओर पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में दस्तावेजों को लेकर स्पष्टीकरण दिया गया, वहीं दूसरी ओर एनसीईआरटी की कक्षा आठवीं की पुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ शीर्षक वाले पाठ पर स्वतः संज्ञान लेने की बात कही गई।
SIR में 10वीं का प्रवेश पत्र भी मान्य
प्रधान न्यायाधीश Surya Kant की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि कक्षा 10 का प्रवेश पत्र, यदि उत्तीर्ण प्रमाण पत्र के साथ संलग्न हो, तो जन्मतिथि और पारिवारिक पहचान के साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जा सकता है।
न्यायालय ने कहा कि अनुच्छेद 3(3)(सी) के तहत संयुक्त दस्तावेज पहचान के लिए मान्य होंगे।
साथ ही निर्देश दिया गया कि 15 फरवरी से पहले प्राप्त सभी दस्तावेज, जो अब तक अपलोड नहीं हुए हैं, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर न्यायिक अधिकारियों को सौंपा जाए। लगभग 80 लाख दावों के निपटारे के लिए 250 जिला न्यायाधीशों की तैनाती को भी मंजूरी दी गई है।
NCERT पुस्तक पर स्वतः संज्ञान
दूसरे मामले में कक्षा आठवीं की सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ विषय शामिल किए जाने पर सीजेआई ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी।
सीजेआई ने इसे गंभीर विषय बताते हुए स्वतः संज्ञान लेने की घोषणा की। एनसीईआरटी सूत्रों के अनुसार विवादित अंश वाली पुस्तक को वेबसाइट से हटा लिया गया है।
वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और कपिल सिब्बल ने भी अदालत में अपनी दलीलें पेश कीं। मामले में आगे की सुनवाई गुरुवार को होगी।







