पांच पुत्रों के रहते बेसहारा हुई मां, न्याय की चौखट तक पहुंची फरियाद
नितेश तिवारी –गढ़वा: जिस मां ने जीवन भर अपने पुत्रों को पालने में भूख, पसीना और सपनों की आहुति दी, वही मां आज रोटी के एक कौर को मोहताज है। ऐसा ही एक हृदयविदारक मामला जिले के भवनाथपुर थाना क्षेत्र के सिंदुरिया गांव से सामने आया है, जिसने न सिर्फ पारिवारिक रिश्तों पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि समाज की संवेदनाओं को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है।
पीड़िता वृद्धा राजकली कुंवर, पति स्वर्गीय राम एकबाल साव, ने अपने लिखित आवेदन में बताया है कि उसके पांच पुत्र चलितर साव, पिंटू साव, धर्मेंद्र साव, अरविंद साव और जीतेंद्र साव हैं। आरोप है कि सभी पुत्र न तो उन्हें भोजन देते हैं और न ही रहने की व्यवस्था। वृद्धा ने यह भी आरोप लगाया कि उसके साथ मारपीट, प्रताड़ना की गई और अंततः उसे घर से बाहर निकाल दिया गया।
पुत्रों की उपेक्षा और अत्याचार से टूट चुकी राजकली कुंवर मंगलवार को न्याय की आस में पुलिस अधीक्षक, गढ़वा के कार्यालय पहुंची। आंखों में आंसू और हाथ में फरियाद लिए खड़ी वृद्धा की पीड़ा ने वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी कार्यालय में तैनात पीएलवी (पैरालीगल वालंटियर) ने वृद्धा को जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए), गढ़वा की सचिव निभा रंजना लकड़ा के समक्ष प्रस्तुत किया। डीएलएसए सचिव ने मानवीय पहल करते हुए तत्काल वृद्धा को श्रीबंशीधर नगर स्थित वृद्धाश्रम में सुरक्षित आश्रय दिलवाया, जहां उसे भोजन, देखभाल और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराया गया।
इतना ही नहीं, डीएलएसए सचिव ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए वृद्धा के सभी पांचों पुत्रों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। यह कार्रवाई उन लोगों के लिए कड़ा संदेश है, जो अपने माता-पिता को बोझ समझकर उन्हें बेसहारा छोड़ देते हैं।
यह मामला केवल एक मां की पीड़ा तक सीमित नहीं है, बल्कि उस सामाजिक सच्चाई को उजागर करता है, जहां संस्कारों की बातें तो होती हैं, लेकिन उन्हें निभाने की जिम्मेदारी से लोग मुंह मोड़ लेते हैं। कानून ने बुजुर्गों के अधिकार सुरक्षित किए हैं, पर सवाल अब भी कायम है—क्या रिश्तों को निभाने के लिए भी अब कानूनी नोटिस की जरूरत पड़ेगी?








