गढ़वा कोर्ट का बड़ा फैसला, डायन-भूत का आरोप लगाकर सगे भाई की हत्या में चार दोषियों को आजीवन सश्रम कारावास
Garhwa: गढ़वा जिला व्यवहार न्यायालय में डायन-भूत का आरोप लगाकर सगे भाई की हत्या के मामले में बड़ा फैसला आया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय Shivnath Tripathi की अदालत ने रमकंडा थाना क्षेत्र अंतर्गत बिराजपुर गांव निवासी लक्ष्मण सिंह, दशरथ सिंह, बैजनाथ सिंह एवं जगन्नाथ सिंह को दोषी ठहराते हुए आजीवन सश्रम कारावास तथा 15,000 रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है।
न्यायालय ने भादवि की धारा 302 के तहत आजीवन सश्रम कारावास एवं 10,000 जुर्माना (जुर्माना नहीं देने पर छह माह अतिरिक्त कारावास) तथा धारा 201 के तहत पांच वर्ष का सश्रम कारावास एवं 5,000 जुर्माना की सजा सुनाई।
इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक उमेश दीक्षित एवं बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता राजेश विश्वास ने अदालत में पक्ष रखा।
2019 की है पूरी घटना
बताया गया कि 22 नवंबर 2019 को मृतक बरत सिंह की पत्नी सरिता देवी के बयान पर Ramkanda Police Station कांड संख्या 85/2019 दर्ज कराया गया था। सूचिका के अनुसार 20 नवंबर 2019 की सुबह करीब 11 बजे बरत सिंह भैंस चराने जंगल गए थे, जबकि उनकी पत्नी रमकंडा बाजार गई थीं। लौटने पर पति के लापता होने की जानकारी मिली।
खोजबीन के दौरान 21 नवंबर को कंदराही नाला के पास गमछा मिला और नाले से शव बरामद हुआ, जिसकी पहचान बरत सिंह के रूप में हुई। शव के दोनों कान कटे हुए थे और गर्दन पर धारदार हथियार से वार के निशान पाए गए थे।
सरिता देवी ने पुलिस को बताया था कि घटना से करीब दस दिन पहले आरोपियों ने झाड़-फूंक कराने का दबाव बनाया था और पति-पत्नी पर डायन होने का आरोप लगाया गया था। विरोध करने पर आरोपियों ने आपराधिक षड्यंत्र रचकर बरत सिंह की हत्या कर दी।
पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत भेजा था और अनुसंधान पूरा कर आरोप पत्र समर्पित किया गया। अदालत ने 12 गवाहों, दस्तावेजी साक्ष्य और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर सभी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।







