गढ़वा: पारंपरिक हथियार लेकर ग्रामीणों ने रोका गढ़वा डीसी का काफिला, पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर खदेडा, सात पर एफ़आइआर
गढ़वा: मंडल डैम परियोजना से विस्थापित होने वाले 780 परिवारों के पुनर्वास पर मंथन करने जा रहे गढ़वा उपायुक्त (DC) के काफिले को ग्रामीणों ने रोक दिया. इसके बाद पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर ग्रामीणों को खदेड़ा गया. जिसके बाद काफिला आगे बढ़ा. इस घटना में कई ग्रामीण चोटिल हो गए. जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है.
इधर इस मामले में सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में सात ग्रामीणों पर नामजद प्राथमिकी दर्ज की गयी है. वहीं तीन लोग हिरासत में हैं.

जानकारी के अनुसार यह मामला मंडल डैम विस्थापितों के पुनर्वास से जुड़ा है। गढ़वा DC और SP के साथ वन विभाग की टीम रंका क्षेत्र के विश्रामपुर और बलिगढ़ इलाके में पुनर्वास व्यवस्था का निरीक्षण करने पहुंची थी।
निरीक्षण के बाद जब अधिकारी लौट रहे थे, उसी दौरान बरवाहा गांव के पास पुनर्वास का विरोध कर रहे ग्रामीणों ने DC के काफिले को रोक दिया और विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस ने रास्ता खाली कराने की कोशिश की। इसी दौरान पुलिस द्वारा ग्रामीणों को हटाने के दौरान हल्का बल प्रयोग किया गया.
विस्थापितों के पुनर्वास का विरोध कर रहे ग्रामीणों का मानना है कि 1970 के ही दशक से लंबित यह परियोजना आसपास के कई गांवों को जलमग्न कर देगी, इससे उनकी आजीविका प्रभावित होगी। साथ ही पयार्वरण को भी नुकसान पहुंचेगा।
जबकि, सरकार का मानना है कि इससे बिहार के गया और औरंगाबाद और झारखंड के पलामू, गढ़वा और लातेहार में सिंचाई के साथ साथ पेयजल की सुविधा बढ़ेगी।
सरकार ने इन्हीं बातों को केंद्र में रखकर परियोजना से विस्थपित होने वाले 780 परिवारों के पुनर्वास के लिए बलीगढ़ एवं विश्रामपुर गांव में कुल 971.69 एकड़ भूमि उपलब्ध कराया है।
यहां प्रत्येक पुनर्वासित परिवार को एक-एक एकड़ भूमि खेती के लिए उपलब्ध कराने के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली, सड़क समेत अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास की योजना है।
“ऐसा कुछ बल का प्रयोग नहीं किया गया. 8-10 लोग रस्ते पर आ गए थे जिन्हें रास्ते से हटाया गया है. सात लोगों पर नामजद प्राथमिकी दर्ज की गयी है. वहीं तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है.:
गढ़वा पुलिस अधीक्षक अमन कुमार
“हमलोग मंडल डैम के विस्थापितों के लिए पुनर्वास योजना पर काम कर रहे हैं। इसको लेकर पदाधिकारियों की टीम बलीगढ़, विश्रामपुर जा रही थी। इसी क्रम में कुछ ग्रामीण वहां पुनर्वास योजना का विरोध करते हुए टीम का रास्ता रोक रहे थे, जिन्हें रास्ते से हटाया गया है। योजना पर काम होगा, इसके लिए बैठक कर पदाधिकारियों को आवश्यक दिशानिर्देश दे दिए गए हैं”
दिनेश कुमार यादव, उपायुक्त, गढ़वा
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 13 अक्तूबर को मंडल डैम पुनर्वास को लेकर विरोध के दौरान बलिगढ़ क्षेत्र में ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों को बंधक बना लिया था। बाद में पुलिस के हस्तक्षेप से अधिकारियों को मुक्त कराया गया था।डीएफओ, रेंजर एवं वनरक्षी मंडल डैम के विस्थापितों के पुनर्वास हेतु वन क्षेत्र में सर्वेक्षण कार्य में जुटे थे। इसी दौरान सूचना पाकर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को घेर लिया।
ग्रामीणों ने तीनों अधिकारियों को लगभग तीन किलोमीटर पैदल चलाते हुए रंका थाना क्षेत्र के बलिगढ़ खेल मैदान तक ले जाकर बंधक बना लिया।
घटना की जानकारी मिलते ही तीन थाना क्रमशः रंका, रामकंडा और भंडरिया थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों से बातचीत कर समझौता कराया। इसके बाद अधिकारियों को मुक्त कराया गया। ग्रामीण विस्थापन और मुआवजा से संबंधित मुद्दों को लेकर आक्रोशित थे।
झामुमो ने प्रशासनिक कार्रवाई की निंदा की, दोषियों पर कार्रवाई की मांग
इस घटना की झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) रंका प्रखंड इकाई ने कड़ी निंदा की है। झामुमो के रंका प्रखंड अध्यक्ष जैनुल्लाह अंसारी ने कहा कि विस्थापितों को बसाने के नाम पर जिला प्रशासन और पुलिस द्वारा ग्रामीणों के साथ बर्बरतापूर्ण कार्रवाई की गई है, जो पूरी तरह गलत है।
उन्होंने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा जल, जंगल और जमीन से जुड़ी पार्टी है और हमेशा गरीबों व आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई लड़ती रही है। विश्रामपुर की इस घटना से राज्य सरकार को अवगत कराया जाएगा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो झामुमो इस मुद्दे को लेकर सड़क से सदन तक आंदोलन करेगा।






